१७. लखनऊ (मार्च २०१०)
लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी,
दशहरी आम,
लखनवी पान,
चिकन और
नवाबों के लिये जाना जाता है।
२००६ मे इसकी जनसंख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% थी।
लखनऊ जिला अल्पसंख्यकों की घनी आबादी वाला जिला है और प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। शहर के बीच से
गोमती नदी गुजरती है, जो लखनऊ की संस्कृति का अभिन्न अंग है। यहां के नवाबी वातावरण में
उर्दु शायरी,
कथक और
अवधी व्यंजन भी खूब विकसित हुए हैं। यहां बहुत से
दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें
इमामबाड़े,
कई उद्यान,
रूमी दरवाज़ा,
छतर मंजिल,
तारामंडल, आदि कुछ हैं।
लखनऊ शहर आधुनिक युग के साथ प्रगति पर अग्रसर है, जिसमें में ढेरों
विद्यालय,
अभियांत्रिकी,
प्रबंधन,
चिकित्सा एवं
अनुसंधान संस्थान हैं।
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१८.महाभारत (मई २०१०)
महाभारत हिन्दुओं का
स्मृति वर्ग में एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है। कभी कभी केवल
"भारत" कहा जाने वाला यह
काव्यग्रंथ भारत का अनुपम
धार्मिक,
पौराणिक,
ऐतिहासिक और
दार्शनिक ग्रंथ है। विश्व का सबसे लंबा
साहित्यिक ग्रंथ और
महाकाव्य यह
हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है। हालाँकि इसे साहित्य की सबसे अनुपम कॄतियों में से एक माना जाता है किन्तु आज भी यह प्रत्येक
भारतीय के लिये एक अनुकरणीय स्रोत है। यह कृति
हिन्दुओं के इतिहास की १,१०,०००
श्लोकों में लिखी गाथा है। इसी में
भगवद्गीता सन्निहित है। काव्य के रचियता
वेद व्यास जी ने इसमे सम्पूर्ण
वेदों के गुप्ततम रहस्य, उनके अंगो एवं
उपनिषदो का विस्तार से निरुपण किया है, इसमे
न्याय,
शिक्षा,
चिकित्सा,
ज्योतिष और
खगोलविद्या,
युद्ध कला,
योग,
अर्थशास्त्र,
कामशास्त्र और
धर्मशास्त्र का विस्तार से वर्णन किया गया है। जब देवताओ ने तराजू के एक पासे में चारो "वेदो" को रखा और दूसरे पर "भारत ग्रंथ" को रखा, तो "भारत" वेदो की तुलना मे अधिक भारी सिद्ध हुआ, ग्रन्थ की इस महता (महानता) को देखकर देवताओ ने इसे "महाभारत" नाम दिया
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१९.वाराणसी (मध्य जून २०१०)
वाराणसी (
बनारस या
काशी)
गंगा नदी के तट पर भारत के
उत्तर प्रदेश राज्य में बसा शहर है। इसे
हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र शहर माना जाता है और यहां
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थापित है। इसके अलावा
बौद्ध एवं
जैन धर्म में भी इसे पवित्र माना जाता है। ये संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक और भारत का प्राचीनतम शहर है। वाराणसी की संस्कृति का
गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्त्व से अटूट संबंध है। ये शहर सहस्रों वर्षों से भारत का, विशेषकर
उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है।
हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का
बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं। यहां के निवासी मुख्यतः काशिका
भोजपुरी बोलते हैं, जो
हिन्दी की ही एक बोली है। वाराणसी को प्रायः
अविमुक्त क्षेत्र, मंदिरों का शहर, भारत की धार्मिक राजधानी, भगवान शिव की नगरी, दीपों का शहर, ज्ञान नगरी आदि
विशेषणों से संबोधित किया जाता है। यहां चार विश्वविद्यालय हैं, जिनमें
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय प्रमुख है। शहर
प्राचीन भारत के
महाजनपदों में से एक था। यहां की
बनारसी रेशमी साड़ी,
बनारसी पान और
कलाकंद प्रसिद्ध हैं।
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२०. हुमायुं का मकबरा (मध्य जुलाई, २०१०)
२१. कुरुक्षेत्र युद्ध (मध्य अगस्त २०१०)
२२.उत्तराखण्ड (सितम्बर २०१०)
२३. अकबर (अक्टूबर २०१०)