वाराणसी/आलेख
| वाराणसी Varanasi | |
| बनारस | |
गंगा किनारे अहिल्या घाट
| |
| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
| देश | साँचा:flag |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| ज़िला | वाराणसी |
| महापौर | कौशलेन्द्र सिंह |
| जनसंख्या • घनत्व |
3147927 (जिला)[१] (साँचा:as of) • साँचा:convert[२] |
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
१,५५० कि.मी² (५९८ वर्ग मील) • साँचा:m to ft |
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साँचा:coord वाराणसी (अंग्रेज़ी: Vārāṇasī, हिन्दुस्तानी उच्चारण: [ʋaːˈɾaːɳəsiː] साँचा:nowrap), जिसे बनारस, उर्दू: साँचा:lang, Banāras [bəˈnɑːɾəs] साँचा:nowrap) और काशी, उर्दू: साँचा:lang, Kāśī [ˈkaːʃiː] साँचा:nowrap) भी कहते हैं, गंगा नदी के तट पर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में बसा शहर है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इसका नाम वाराणसीं वरुणा ओर असि नदियों के नाम के मिलाने से बना है !जो प्राचीन समय में यहा बहती थी !इसे हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र शहर माना जाता है और इसे अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है।[३][४] इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इसे पवित्र माना जाता है। ये संसार के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक और भारत का प्राचीनतम बसा शहर है।[५][६]
काशी नरेश (काशी के महाराजा) वाराणसी शहर के मुख्य सांस्कृतिक संरक्षक एवं सभी धार्मिक क्रिया-कलापों के अभिन्न अंग हैं।[७] वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्त्व से अटूट रिश्ता है। ये शहर सहस्रों वर्षों से भारत का, विशेषकर उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं, जिनमें कबीर, रविदास, स्वामी रामानंद, त्रैलंग स्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां कुछ हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने हिन्दू धर्म का परम-पूज्य ग्रन्थ रामचरितमानस यहीं लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन यहीं निकट ही सारनाथ में दिया था।[८]
वाराणसी में चार बड़े विश्वविद्यालय स्थित हैं: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइयर टिबेटियन स्टडीज़ और संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय। यहां के निवासी मुख्यतः काशिका भोजपुरी बोलते हैं, जो हिन्दी की ही एक बोली है। वाराणसी को प्रायः मंदिरों का शहर, भारत की धार्मिक राजधानी, भगवान शिव की नगरी, दीपों का शहर, ज्ञान नगरी आदि विशेषणों से संबोधित किया जाता है।[९]
प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं: "बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, दंतकथाओं (लीजेन्ड्स) से भीप्राचीन है और जब इन सबकों एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से दोगुना प्राचीन है।"[१०]
चित्र दीर्घा
- Benares 1890.jpg
बनारस का तैल चित्र, १८९०
- Kedar Ghat Benares, August 2005.jpg
वाराणसी के एक घाट पर लोग हिन्दू रिवाज करते हुए।
- Ganga Aarti at Varanasi ghats.jpg
वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर गंगाजी की आरती दृश्य
- New Vishwanath Temple at BHU 2007.jpg
बी.एच.यू में नये विश्वनाथ मंदिर का स्थापत्य
- Varanasi Railway Station.JPG
वाराणसी जंक्शन के बाहर का दृश्य
- Older Durga Temple - Banaras.jpg
रामनगर, वाराणसी में दुर्गा मंदिर
सन्दर्भ
- ↑ साँचा:cite web
- ↑ साँचा:cite web
- ↑ :अविमुक्तं समासाद्य तीर्थसेवी कुरुद्वह। :दर्शनादेवदेस्य मुच्यते ब्रह्महत्यया॥ (महाभारत, वन पर्व., ८४/१८)
- ततो वाराणसीं गत्वा देवमच्र्य वृषध्वजम्। कपिलाऊदमुपस्पृश्य राजसूयफलं लभेत् ॥(महाभारत, वन पर्व., ८२/७७)। सन्दर्भ:काशी तथा वाराणसी का तीर्थ स्वरुप स्क्रिप्ट त्रुटि: "webarchive" ऐसा कोई मॉड्यूल नहीं है।। वाराणसी वैभव
- ↑ काशी- मुक्ति की जन्मभूमिसाँचा:category handlerसाँचा:main otherसाँचा:main other[dead link]। माई वेब दुनिया। २९ अक्टूबर २००९। अभिगमन तिथि:२५ अप्रैल २०१०
- ↑ साँचा:cite book
- ↑ साँचा:cite web
- ↑ साँचा:cite book
- ↑ साँचा:cite web
- ↑ साँचा:cite web
- ↑ साँचा:cite book
बाहरी कड़ियाँ
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