ऐतराज़

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ऐतराज़
चित्र:ऐतराज़ हिन्दी पोस्टर.jpg
ऐतराज़ का एक पोस्टर
निर्देशक अब्बास-मस्तान
निर्माता सुभाष घई
पटकथा श्याम गोयल
शिराज़ अहमद
अभिनेता अक्षय कुमार
करीना कपूर
प्रियंका चोपड़ा
संगीतकार हिमेश रेशमिया
छायाकार रवि यादव
संपादक हुसैन ए॰ बर्मावाला
स्टूडियो मुक्ता आर्ट्स
वितरक मुक्ता आर्ट्स
प्रदर्शन साँचा:nowrap १२ नवंबर २००४
समय सीमा १५९ मिनट[१]
देश भारत
भाषा हिन्दी
लागत ११ करोड़[२]
कुल कारोबार २६ करोड़[२]

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ऐतराज़ (साँचा:lang-hi) २००४ में प्रदर्शित हिन्दी भाषा की एक रोमांटिक थ्रिलर फ़िल्म है, जिसके निर्देशक अब्बास-मस्तान हैं। सुभाष घई द्वारा निर्मित इस फ़िल्म की पटकथा श्याम गोयल और शिराज अहमद ने लिखी है। अक्षय कुमार, करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा ने फ़िल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं, जबकि अमरीश पुरी, परेश रावल और अन्नू कपूर ने अन्य सहायक भूमिकाओं का निर्वहन किया है। यह तीसरी ऐसी फ़िल्म है, जिसमें कुमार और चोपड़ा एक साथ दिखाई दिए हैं। फ़िल्म के लिए संगीत हिमेश रेशमिया ने रचा है, और इसके गीत समीर ने लिखे हैं।

ऐतराज़ की कहानी कुमार द्वारा अभिनीत राज मल्होत्रा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर उसकी बॉस (चोपड़ा द्वारा अभिनीत) द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाते हैं। १२ नवंबर २००४ को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई इस फ़िल्म को समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली; विशेषकर सोनिया रॉय के अभिनय के लिए चोपड़ा को काफी सराहा गया। ऐतराज़ व्यावसायिक तौर पर भी सफल रही थी; ११ करोड़ रुपये के बजट पर बनी इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर २६ करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय किया। यौन उत्पीड़न जैसे मुद्दे को उठाने के अपने साहसी कदम के कारण भी फ़िल्म ने काफी ख्याति अर्जित की।

ऐतराज़ को कई पुरस्कार तथा नामांकन प्राप्त हुए, हालाँकि उनमें से अधिकतर चोपड़ा के लिए थे। पचासवें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार समारोह में उन्हें दो नामांकन प्राप्त हुए: सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, जिनमें से बाद वाले को जीतने पर वह इस पुरस्कार को जीतने वाली दूसरी (और अंतिम)साँचा:efn अभिनेत्री बन गई। इसके अतिरिक्त चोपड़ा ने इसी फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का बंगाल फ़िल्म पत्रकार संगठन पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ खलनायक का स्क्रीन पुरस्कार भी जीता। ऐतराज़ को २००५ के आइफ़ा पुरस्कार समारोह में भी दस नामांकन प्राप्त हुए, जिसमें से इसने तीन पर विजय प्राप्त की।

कथानक

राज मल्होत्रा ​​(अक्षय कुमार) एयर वॉयस नामक एक दूरसंचार कंपनी में कार्यरत एक इंजीनियर है। एक जूनियर वकील, प्रिया सक्सेना (करीना कपूर) साक्षात्कार देने के लिए राज के पड़ोसी तथा मित्र अधिवक्ता राम चौटरानी (अन्नू कपूर) के घर जाने की जगह गलती से राज के घर पहुँच जाती है। दोनों प्यार में पड़ते हैं, शादी करते हैं और शीघ्र ही प्रिया गर्भवती हो जाती है। राज की कंपनी के चेयरमैन (अमरीश पुरी) जब अपनी नई पत्नी सोनिया रॉय (प्रियंका चोपड़ा) के साथ ऑफिस वापस आते हैं, तो वह इस उम्मीद में होता है कि उसे पदोन्नत कर सीईओ बना दिया जायेगा। सोनिया रॉय को कंपनी की नई अध्यक्ष घोषित किया जाता है; और अपने पति के साथ चर्चा करने के बाद, वह पदोन्नतियों की घोषणा कर देती है। सीईओ का पद तो राज की बजाय उसके दोस्त राकेश (विवेक शौक) को मिल जाता है, जबकि राज को निदेशक मंडल का सदस्य बना दिया जाता है। उसी रात एक पार्टी में प्रिया को राज की नई बॉस सोनिया रॉय के बारे में पता चलता है, जो इस बात पर आश्चर्यचकित रह जाती है कि सोनिया वास्तव में उम्रदराज श्रीमान रॉय की पत्नी है। राज और उसके सहयोगी भी सोनिया की सुंदरता, और उसके पति और उसकी उम्र के अंतर के बारे में बातें करते हैं; राज भी मज़ाक-मज़ाक में एक बार कह देता है कि उसके आकर्षक व्यक्तित्व के कारण ही उसी इतने बड़े पद पर पदोन्नत किया गया है। इस समय तक यह भी स्पष्ट हो जाता है कि राज सोनिया से इससे पहले भी कभी मिल चुका है।

एक फ्लैशबैक दृश्य में सोनिया के साथ राज का पिछला रिश्ता भी दर्शाया जाता है। पांच साल पहले, राज और सोनिया (जो तब एक मॉडल थी) केप टाउन के एक समुद्र तट पर मिलते हैं। वे प्यार में पड़ जाते हैं और एक साथ रहने लगते हैं। सोनिया शीघ्र ही राज के बच्चे के साथ गर्भवती हो जाती है, जिससे राज काफी खुश हो जाता है, और सोनिया के सामने विवाह का प्रस्ताव रखता है। हालाँकि, सोनिया इस प्रस्ताव को ठुकरा देती है, और राज को बताती है कि वह इस गर्भावस्था को समाप्त करने जा रही है, क्योंकि सोनिया के अनुसार उसका यह बच्चा भविष्य में और अधिक धन, प्रसिद्धि, शक्ति और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के उसके इरादे में बाधा उतपन्न कर सकता है। उनका रिश्ता तत्काल समाप्त हो जाता है।

अगले दिन, राकेश कंपनी के एक नए मोबाइल हैंडसेट में आये एक दोष के बारे में राज को बताता है: उस फ़ोन से किसी व्यक्ति को कॉल लगाने पर वह कॉल उसके साथ-साथ फ़ोन की संपर्क सूची में संचित किसी भी यादृच्छिक व्यक्ति को लग रही थी। राज तुरंत मोबाइल का उत्पादन रोकने का निर्णय लेता है, जिसके लिए उसे सोनिया की अनुमति की आवश्यकता होती है। सोनिया इस मामले पर चर्चा के लिए राज को अपने घर में आमंत्रित करती है, जहाँ वह राज से उत्तेजक बातें करने लगती है, हालाँकि राज उन्हें अनदेखा करता रहता है। इसके बाद वह और भी ज़ोर देकर राज को लुभाने की कोशिश करती है, पर राज इसका विरोध करता है। जब राज वहां से जाने लगता है, तो सोनिया उसकी बात ना मानने पर उसे दंडित करने की धमकी देती है। अगले दिन, उसे पता चलता है कि सोनिया ने अपने पति से उसकी शिकायत करते हुए कहा कि उसने सोनिया का यौन उत्पीड़न किया है। चूंकि राज हमेशा ही सोनिया को आकर्षक कहता रहा था, इसलिए निर्दोष होने का उसका दावा अस्वीकार कर दिया गया, और कंपनी उस पर त्यागपत्र देने का दबाव डालने लगी।

राज चौटरानी से सहायता मांगता है, जो उसे त्यागपत्र न देने, और काम पर लगातार जाते रहने की सलाह देता है। मामला न्यायलय में पहुँचता है; सोनिया और रॉय अपना पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता पटेल (परेश रावल) को नियुक्त करते हैं। प्रारंभ में, लगभग सारे साक्ष्य राज के विरुद्ध पाए जाते हैं, और इस प्रकरण को व्यापक मीडिया कवरेज प्राप्त होती है। इसी समय राज का बैंक मैनेजर बैंकाक से लौटता है, और उसे एक टेप देता है, जिसमें सोनिया और राज की सारी बातें दर्ज होती हैं। टेप असली साबित होती है, लेकिन इससे पहले कि चौटरानी उसे साक्ष्य के तौर पर न्यायालय में प्रस्तुत कर सके, सोनिया द्वारा प्रायोजित एक कार दुर्घटना में वह बुरी तरह घायल हो जाता है, और टेप नष्ट हो जाता है। इसके बाद प्रिया न्यायलय में राज का केस लड़ने का निश्चय करती है।

जब प्रिया राज से पूछती हैं कि आखिर उसने सोनिया के घर से अपने बैंक मैनेजर को फ़ोन क्यों लगाया था, तो तब वह याद करके बताता है कि उसने तो फ़ोन राकेश को लगाया था, लेकिन उस फ़ोन मॉडल में खराबी के कारण एक कॉल बैंक मैनेजर के पास भी चली गयी, जिसने इसे रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद प्रिया न्यायालय में केप टाउन में राज के साथ सोनिया के पुराने रिश्ते को उजागर करती है, और फिर आखिर में राकेश के वॉयस मेल को अदालत में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करती है - यह बताते हुए कि उस दिन राज और सोनिया के बीच वास्तव में क्या हुआ था। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि सोनिया ने पैसे, शक्ति और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए रॉय से शादी की थी, लेकिन जब वह यौन संबंधों को निभा नहीं सका, तो उसने राज के साथ अपने रिश्ते को फिर से शुरू करने का प्रयास किया। फलस्वरूप, राज न्यायालय से बरी हो जाता है और रॉय सोनिया को छोड़ कर हमेशा के लिए चला जाता है। अपराधबोध से पीड़ित और अपमानित, सोनिया एक भवन से कूदकर आत्महत्या कर लेती है। अंत क्रेडिट दृश्य में राज और प्रिया अपने बच्चे को चलना सिखा रहे होते हैं।

पात्र

२००४ में फ़िल्म के सेट पर चोपड़ा (बायें), कुमार (मध्य) तथा कपूर (दायें)।

फ़िल्म के मुख्य पात्र निम्न हैं:[३] साँचा:div col

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निर्माण

निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को इस फ़िल्म की प्रेरणा नेशनल बास्केटबॉल असोसिएशन के खिलाड़ी कोबी ब्रायंट से मिली, जिस पर उसकी एक प्रशंसक द्वारा बलात्कार का आरोप लगाया गया था;[४] उन दोनों ने समाचार पत्रों में इस यौन हमले के मामले के बारे में पढ़ते-पढ़ते फ़िल्म की कहानी विकसित करना शुरू किया।[५] फ़िल्म के असामान्य शीर्षक के बारे में उन्होंने कहा कि "ऐतराज़" आम बोलचाल का शब्द था और विषय के अनुकूल था।[५] श्याम गोयल और शिराज अहमद ने फ़िल्म की पटकथा लिखी, जबकि हुसैन ए॰ बर्मावाला और आर॰ वर्मन को क्रमश: फ़िल्म संपादन और कला निर्देशन का दायित्व दिया गया।[६]

अक्टूबर २००३ में निर्माता सुभाष घई ने अपनी फ़िल्म-निर्माण कंपनी मुक्ता आर्ट्स की पच्चीसवीं वर्षगांठ मनाते समय फ़िल्म की घोषणा की थी।[७] मीडिया में आयी खबरों में बताया गया कि अक्षय कुमार, करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा को मुख्य भूमिकाऐं निभाने के लिए फ़िल्म में शामिल किया गया था; यह बेहद सफल अंदाज़ (२००३) और मुझसे शादी करोगी (२००४) के बाद कुमार और चोपड़ा की एक साथ तीसरी फ़िल्म होनी थी।[७][८] कुमार का चरित्र अपने कार्यस्थल पर बलात्कार का आरोप झेल रहे एक कामकाजी व्यक्ति राज का था, जबकि कपूर को उसकी सहायक पत्नी को चित्रित करना था, जो उसकी रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।[४] निर्देशकों के अनुसार उन्होंने कुमार को काफी अलग चरित्र में डाला था; इससे पहले कुमार आम तौर पर एक्शन भूमिकाएं ही निभाते रहे थे, और वे चाहते थे कि कुमार अपने चरित्र को हल्के में लें।[५] अब्बास-मस्तान, जिनकी फ़िल्मों की पहचान उनकी स्टाइलिश थ्रिलर कहानियों और मनोरंजक खलनायकों से होती है,साँचा:efn ने चोपड़ा को उनकी पहली नकारात्मक भूमिका में डाला।[८] चोपड़ा ने एक ऐसी महिला की भूमिका निभानी थी, जो अपनी से उम्र दो गुना से भी ज्यादा बड़े व्यक्ति (अमरीश पुरी द्वारा अभिनीत) से विवाहित है, और बदला लेने के लिए अपने पूर्व प्रेमी (कुमार) पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाती है। यौन उत्पीड़न जैसे विवादास्पद विषय पर आधारित होने के कारण, चोपड़ा इस तरह के बोल्ड चरित्र को निभाने को लेकर आशंकित थी, लेकिन अब्बास-मस्तान और सुभाष घई के आश्वस्त करने पर उन्होंने यह भूमिका स्वीकार कर ली।[९][१०] निर्देशक जोड़ी ने पहले उन्हें २००२ की थ्रिलर हमराज़ में भी मुख्य भूमिका की पेशकश की थी, जिसे तब वह स्वीकार नहीं कर सकी थी।[११]

कुमार ने अपने चरित्र को "यथार्थवादी" और एक "नए युग के मेट्रोसेक्सुअल" व्यक्ति के रूप में वर्णित किया। अभिनेता ने खुलासा किया कि उन्होंने अपने चरित्र की ताकत और कमजोरियों का आनंद लिया, और कहा कि "[वह] अपनी भावनाओं को दिखाने से डरता नहीं है और न ही परिस्थिति के कारण खुद को शक्तिहीन समझता है।"[१२] कुमार ने आगे कहा: "मेरे चरित्र से एक शांत गरिमा और वीरता जुड़ी हुई है। वह प्रशंसा के लिए नहीं लड़ता है। वह लड़ता है, तो प्रतिबद्धता के लिए।"[१२] ट्रिब्यून इंडिया के साथ एक साक्षात्कार में कपूर ने टिप्पणी की कि भारतीय महिलाएं उनके चरित्र को अपने समान पाएंगी।[१३] उन्होंने कहा कि उनकी चरित्र "संकट और असहायता के हर क्षण में [राज के] साथ खड़ी है, हर भारतीय महिला की तरह।"[१३] चोपड़ा ने अपनी चरित्र सोनिया को "आकर्षक और ध्यान-केंद्रित" बताया, उन्होंने टिप्पणी की कि उसका "दर्शन यह है कि उसे किसी भी कीमत पर अपने लक्ष्यों को हासिल करना है। वह एक ही बात जानती है: उसकी इच्छाओं और खुद उसके बीच कुछ भी नहीं आ सकता है।"[१०] अपने रूढ़िवादी पालन-पोषण के कारण चोपड़ा अपनी "पुरुष बदलने वाली भूमिका" से मुश्किल से पहचान कर पायी।[९] एक "बेहद नकारात्मक चरित्र" निभाना उनके लिए एक चुनौती साबित हुआ, और इसके लिए उन्हें प्रत्येक दृश्य से पहले लगभग एक घंटा खुद को मानसिक रूप से तैयार करने में लगता था।[१४]

मनीष मल्होत्रा ​​और विक्रम फडनीस ने फ़िल्म के लिए वेशभूषाऐं तैयार की, और छायांकन का काम रवि यादव द्वारा संभाला गया था।[६] फ़िल्म मुख्य रूप से केप टाउन, गोवा, पुणे और मुंबई में फ़िल्माई गई थी।[५] उसी समय चार अन्य फ़िल्मों में भी काम कर रही चोपड़ा ने खुलासा किया कि उनके व्यस्त कार्यक्रम के कारण अन्य फिल्मों के निर्माताओं को अपना सेट फ़िल्मिस्तान स्टूडियो में ले जाना पड़ा था, जहां ऐतराज़ का फ़िल्मांकन चल रहा था।[११] यौन उत्पीड़न वाले दृश्य के फिल्मांकन के दौरान वह खूब रोई थी; निर्देशकों को कई घंटों तक उन्हें याद दिलाना पड़ा कि यह केवल एक किरदार था, और आगे का फिल्मांकन स्थगित कर दिया गया।[१५] शीर्षक गीत "ऐतराज़ – आई वांट टू मेक लव टू यू" की पूरी संगीत वीडियो कुमार और चोपड़ा के साथ स्टेडिकैम द्वारा एक ही टेक में फ़िल्माई गई थी।[१६] सलीम-सुलेमान ने फ़िल्म का पार्श्व संगीत रचा था।[६]

संगीत

ऐतराज़
फ़िल्म एल्बम हिमेश रेशमिया द्वारा
जारी २४ सितम्बर २००४
संगीत शैली बॉलीवुड संगीत
लंबाई ७२:१६
लेबल सोनी म्यूजिक
निर्माता हिमेश रेशमिया

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ऐतराज़ फ़िल्म में संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है, तथा इसके गीत समीर ने लिखे हैं। फ़िल्म की संगीत एल्बम २४ सितम्बर २००४ को सोनी म्यूजिक द्वारा जारी की गई थी,[१७] और इसमें कुल पंद्रह गाने हैं: सात मूल तथा आठ रीमिक्स। उदित नारायण, अलका याज्ञनिक, सुनिधि चौहान, अदनान सामी, केके, तथा अलीशा चिनॉय समेत कई गायकों ने फ़िल्म के लिए गीत गाये हैं।

एल्बम को आमतौर पर समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली, जिन्होंने इसके गीतों के बोलों की, और गायन की प्रशंसा की। प्लेनेट बॉलीवुड की ओर से समीक्षा करते हुए आबिद ने एल्बम को "अच्छी एल्बम" कहते हुए १० में से ७ अंक दिए।[१८] बॉलीवुड हंगामा के जोगिन्दर टुटेजा ने एल्बम को ५ में से ३ अंक दिए, और "आई वांट टू मेक लव टू यू" गीत के तीनों संस्करणों की प्रशंसा करते हुए लिखा: "सुनिधि चौहान इस अद्भुत रूप से रचित गीत में उत्कृष्ट है, जो गीत और संगीत की गहनता से सभी को चौंका देता है"। उन्होंने यह भी कहा कि "यहाँ-वहां दो या तीन औसत गीतों के अतिरिक्त, ऐतराज़ के अधिकतर गीत आपको व्यस्त रखते हैं"।[१९] ग्लैमशैम के रौनक कोटेचा ने हालाँकि इसे "आवश्यकता आधारित" बताया, और लिखा कि "एल्बम से हिमेश का सुखद और मोहक संगीत गायब है, और कोई भी गीत तब तक आपकी सराहना नहीं प्राप्त कर सकता है, जब तक कि आप उन्हें स्वयं ऐसा करने नहीं देते।"[२०]

फ़िल्म के गीत भारत के कई संगीत चार्टों में शीर्ष पर रहे।[२१] बॉक्स आफिस इंडिया के अनुसार लगभग १५ लाख बिक्रियों के साथ, ऐतराज़ उस वर्ष की सर्वाधिक बिकने वाली संगीत एल्बमों में एक थी।[२२] साँचा:clear साँचा:track listing

रिलीज़ तथा विपणन

फ़िल्म का पहला पोस्टर, जिसकी टैगलाइन थी: "महिलाओं की दुनिया में, आप या तो उनके नियमों से खेलते हैं या फिर ...", समीक्षकों द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने में सफल रहा था;[२३][२४] फ़िल्म के ट्रेलरों को भी इसी प्रकार अच्छी समीक्षाएं मिली। अक्टूबर २००४ में, फ़िल्म का एक विशेष फुटेज व्यापार विशेषज्ञों और समीक्षकों को दिखाया गया था, जिससे फ़िल्म के बारे में एक सकारात्मक माहौल तैयार हुआ। फ़िल्म के ट्रेलरों तथा संगीत ने भी इसके विपणन में सहायता की।[२१]

११ करोड़ रूपये के बजट पर बनी यह फ़िल्म १२ नवंबर २००४ को दिवाली उत्सव के सप्ताहांत के दौरान ३७५ पर्दों पर जारी की गयी थी।[२] यह तीन अन्य प्रमुख फ़िल्मों के साथ-साथ रिलीज़ हुई: वीर-ज़ारा, मुगल-ए-आज़म का रंगीन संस्करण, और नाच। फ़िल्म को महानगरों के सिनेमाघरों में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, और साथ ही अन्य स्थानों पर भी ठीक-ठाक प्रतिक्रियाएं मिली। यश चोपड़ा की वीर-ज़ारा के बाद ऐतराज़ उस सप्ताह की दूसरी सबसे ज्यादा प्रचलित रिलीज थी।[२५][२६]

फ़िल्म को डीवीडी पर ६ दिसंबर २००४ को एक पीएएल प्रारूप की एकल डिस्क में सभी क्षेत्रों में जारी किया गया।[२७] शेमारू एंटरटेनमेंट द्वारा वितरित इस डीवीडी में एक मेकिंग ऑफ द फ़िल्म सेगमेंट, और एक फोटो गैलरी भी शामिल थी।[२८] डीवीडी के साथ-साथ फ़िल्म का वीसीडी संस्करण भी जारी कर दिया गया।[२८] ऐतराज़ के विशेष प्रसारण अधिकार ज़ी नेटवर्क ने खरीदे,[२९] और फिर ३० अक्टूबर २००५ को ज़ी सिनेमा पर इस फ़िल्म का भारतीय टेलीविजन प्रीमियर हुआ।[३०] ऐतराज़ को कन्नड़ में श्रीमती नाम से पुनर्निर्मित भी किया गया। २०११ में रिलीज़ हुए इस कन्नड़ संस्करण में उपेंद्र, प्रियंका त्रिवेदी और सेलिना जेटली ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थी।[३१]

परिणाम

बॉक्स ऑफिस

ऐतराज़ ने भारत में कुल २२.७४ करोड़ रुपये, तथा विदेशों में ७.३५ लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ३.३ करोड़ रुपये) की कमाई की, जिससे इसकी कुल वैश्विक कमाई लगभग २६ करोड़ रुपये रही।[२] अपनी कुल कमाई के आधार पर यह २००४ की ग्यारहवीं सर्वाधिक कमाई करने वाली फ़िल्म थी।[३२] बजट तथा विपणन इत्यादि में हुए अन्य खर्चों को निकाल देने पर फ़िल्म की सकल आय लगभग १५.५८ करोड़ रुपये रही। ११ करोड़ के बजट पर बनी इस फ़िल्म को बॉक्स ऑफिस इंडिया द्वारा "एवरेज" घोषित किया गया।[२]

भारत में कुल ३७५ पर्दों पर रिलीज़ हुई ऐतराज़ ने अपने प्रदर्शन के प्रथम दिन कुल १.१८ करोड़ रुपये का व्यापार किया।[३३] अगले २ दिनों में ३.२८ करोड़ की अतिरिक्त कमाई के साथ, प्रथम सप्ताहांत में फ़िल्म का कुल संग्रह ४.४६ करोड़ रुपये रहा।[३४] अगले ४ दिनों में फ़िल्म ने फिर ३.२ करोड़ रुपये कमाए, जिससे प्रथम सप्ताह पूर्ण होने पर भारत में इसकी कमाई ७.६६ करोड़ रुपये रही। फ़िल्म भारत में कुल ११ सप्ताहों तक प्रदर्शित हुई, और इसने अपने दूसरे सप्ताह में ३.९६५ करोड़ की, तीसरे में १.७८ करोड़ की, चौथे में १.१४ करोड़ की, पांचवें में ५० लाख की, छठे में २४ लाख की, सातवें में १३३.५ लाख की, आठवें में ८.५ लाख की, नवें में ४.५ लाख की, दसवें में २ लाख की और ग्यारहवें सप्ताह में १ लाख की कमाई की।[३५]

विदेशी बाजारों में, इस फ़िल्म ने अपने प्रथम सप्ताहांत में संयुक्त राज्य, यूनाइटेड किंगडम और अन्य विदेशी बाजारों से लगभग २.४ लाख डॉलर इकट्ठा किये। इन तीन दिनों में फ़िल्म ने यूनाइटेड किंगडम में ५५,८३७ पाउंड और उत्तरी अमेरिका में ७०,३१२ डॉलर की कमाई करी।[२] अपने पहले सप्ताह के अंत तक यह सभी विदेशी बाजारों से ३.५ लाख डॉलर के आसपास एकत्र कर चुकी थी।[२] इसके बाद फ़िल्म ने विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम में अच्छा प्रदर्शन करते हुए वहां लगभग २.४ लाख पाउंड की कमाई और कर ली। इसके अतिरिक्त फ़िल्म ने उत्तरी अमेरिका में भी लगभग १.५ लाख डॉलर कमाए। इस प्रकार, विदेशों में इसका कुल संग्रह ७.३५ लाख अमेरिकी डॉलर रहा।[२]

समीक्षाएँ

A photograph of Priyanka Chopra looking forward, smiling and posing for the camera
प्रियंका चोपड़ा के अभिनय की समीक्षकों द्वारा विशेष रूप से सराहना की गई थी।

ऐतराज़ को आम तौर पर समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली, जिन्होंने इसके निर्देशन, संगीत और कलाकारों के अभिनय (खासकर प्रियंका चोपड़ा) की प्रशंसा की।[३६][३७][३८] यौन उत्पीड़न जैसे मुद्दे को उठाने के कारण भी इस फ़िल्म को सराहा गया।[३९] कई समीक्षकों ने यह भी महसूस किया, कि फ़िल्म का प्रेमिस १९९४ की अमेरिकी फ़िल्म डिसक्लोज़र के समान था।[३९][४०] बीबीसी के लिए लिखते हुए समीक्षक जय ममतोरा ने फ़िल्म की थीम, संगीत और कलाकारों के अभिनय की सराहना की, और टिप्पणी की कि "अब्बास-मस्तान ने पूरी अवधारणा का 'भारतीयकरण करने' में अच्छा काम किया है। उन्होंने इसे "बहुत रोमांचक और आकर्षक ड्रामा" के रूप में वर्णित किया जो दर्शकों को अपनी सीटों पर पकड़ कर रखता है।[४१] बॉलीवुड हंगामा के तरण आदर्श ने फ़िल्म को ५ में से ३.५ अंक देते हुए इसे "एक अच्छी तरह से तैयार थ्रिलर" कहा और फ़िल्म के "नाटकीय क्षणों" के लिए, एवं एक ऐसी थीम पर फ़िल्म बनाने के लिए निर्देशकों को प्रशंसा की, "जिसे अब तक भारतीय सिनेमाघरों पर किसी ने छुआ तक नहीं था।"[३९]

ममतोरा की ही तरह, आदर्श ने भी माना कि यह फ़िल्म पूरी तरह से प्रियंका चोपड़ा से संबद्ध थी, और चरित्र की उनकी समझ से वह काफी प्रभावित हुए; उन्होंने लिखा कि "वह एक विशेषज्ञ की तरह भूमिका के भीतर अपना रास्ता बना लेती है, और दर्शकों की सारी घृणा ऐसे अपनी तरफ खींच लेती है, जैसे एक चुम्बक लोहे के टुकड़ों को इकट्ठा करता है।"[३९] चोपड़ा के साथ साथ उन्होंने करीना कपूर और अक्षय कुमार के अभिनय की भी सराहना की।[३९] रीडिफ डॉट कॉम की पेटसी एन ने आम जनता के प्रति फ़िल्म की अपील की सराहना की, और इसकी विषय वस्तु को "साधारण घटनाओं से कुछ अलग" पाया। उन्होंने संगीत और कोरियोग्राफी की भी प्रशंसा की।[४२] इंडिया टुडे के लिए लिखते हुए फ़िल्म आलोचक अनुपमा चोपड़ा ने चोपड़ा के "प्रभावशाली" अभिनय की सराहना करते हुए फ़िल्म को एक "अच्छा टाइमपास" करार दिया।[४३]

द हिंदू के सुधीश कामथ ने टिप्पणी की कि "हालांकि फ़िल्म का पहला भाग सही गति से चलता है, परन्तु दूसरा भाग समय पूरा करने के लिए जबरदस्ती डाले गए गानों और कहानी के मोड़ों के कारण ढीला रहता है", हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यह फ़िल्म "अपने शानदार उत्पादन, कुछ मजेदार संवादों, ग्लैम कोशंट और स्टार अपील के साथ पारगम्य थी।"[४०] समीक्षक सुभाष के झा ने फ़िल्म को ५ में से २ अंक देते हुए इसकी "डिशनी डिग्रेशन" और "पेरिफेरल सब-प्लॉट्स" की आलोचना की, हालाँकि वे फ़िल्म के न्यायालय वाले दृश्य से प्रभावित हुए, जिसे उन्होंने "शानदार" माना। उन्होंने चोपड़ा के प्रदर्शन को भी "विजयी" पाया, और टिप्पणी की कि "एक सितारा पैदा हुआ है! एक हिंसक उच्च सामाजिक स्थिति प्राप्त करने हेतु इच्छुक मोहक के तौर पर, जो जीवन के प्रति अपनी वासना को तृप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, प्रियंका चोपड़ा इस तरह के दृश्य को ऐसे निभाती हैं, जैसे पहले कभी किसी ने नहीं निभाया है।" झा का मानना ​​था कि करीना को गैर-ग्लैमरस भूमिका में लेना थोड़ा अजीब था, लेकिन "क्लाइमेक्स के न्यायालय अनुक्रम में वह पूरी तरह चरित्र में आ जाती है";[४४] एक भावना, जो टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखी अपनी समीक्षा में जीतेश पिल्लई ने भी दोहराई। पिल्लई ने फ़िल्म को ५ में से ३ अंक दिए, और कहा कि "ये वो नाटक नहीं है जिसके लिए निर्देशक प्रयास कर रहे थे, परन्तु फिर भी फ़िल्म अपना काम कर लेती है।"[४५]

नामांकन और पुरस्कार

पुरस्कार श्रेणी नामित व्यक्ति परिणाम सन्दर्भ
बंगाल फ़िल्म पत्रकार संगठन पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा साँचा:won [४६]
फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा साँचा:nom [४६]
[४७]
सर्वश्रेष्ठ खलनायक प्रियंका चोपड़ा साँचा:won
ग्लोबल इंडियन फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ खलनायक – महिला प्रियंका चोपड़ा साँचा:won [४८]
अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फ़िल्म अकादमी पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री करीना कपूर साँचा:nom [४९]
[५०]
[५१]
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता परेश रावल साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ संगीतकार हिमेश रेशमिया साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ गीतकार समीर ("वो तसव्वुर" गीत के लिए) साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक उदित नारायण ("आँखें बंद करके" गीत के लिए) साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका अलका याज्ञनिक ("आँखें बंद करके" गीत के लिए) साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ कहानी शीराज़ अहमद, श्याम गोयल साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ सम्पादन हुसैन ए बर्मावाला साँचा:won
सर्वश्रेष्ठ ध्वनि रिकॉर्डिंग राकेश राजन साँचा:won
सर्वश्रेष्ठ ध्वनि री-रिकॉर्डिंग अनूप देव साँचा:won
प्रोड्यूसर्स गिल्ड फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा साँचा:nom [५२]
स्टार स्क्रीन पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ खलनायक प्रियंका चोपड़ा साँचा:won [४७]
जोड़ी नंबर १ अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा साँचा:nom
ज़ी सिने पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ खलनायक प्रियंका चोपड़ा साँचा:nom [५३]
सर्वश्रेष्ठ संगीतकार हिमेश रेशमिया साँचा:nom
सर्वश्रेष्ठ गीतकार समीर साँचा:nom

इन्हें भी देखें

टिप्पणियां

साँचा:notelist

सन्दर्भ

  1. साँचा:cite web
  2. इस तक ऊपर जायें: साँचा:cite web
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