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अमोल पालेकर (जन्म: 24 नवंबर, 1944)[१] हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। अपने अभिनय से सभी का दिल बहलाने के बाद आजकल वे एक निर्देशक के रूप मे कही ज्यादा सक्रिय हैं।
व्यक्तिगत जीवन
ऐक्टर बनने से पहले अमोल पालेकर थिएटर जगत में निर्देशक के रूप में स्थाई पहचान बना चुके थे। नामचीन निर्देशक सत्यदेव दुबे के साथ उन्होंने मराठी थिएटर में कई नए प्रयोग किए। बाद में 1972 में उन्होंने अपना थिएटर ग्रुप अनिकेत शुरू किया। वे ऐक्टिंग में आने से पहले थिएटर में निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य उनके नाटक देखने आया करते थे।
1971 में सत्यदेव दुबे की मराठी फ़िल्म शांतता कोर्ट चालू आहे से अमोल ऐक्टिंग में आए। यह मराठी सिनेमा की उल्लेखनीय फ़िल्म कही जाती है। हिंदी फ़िल्मों में उन्होंने सन 1974 में बासु चटर्जी की फ़िल्म रजनीगंधा से कदम रखा। फ़िल्म सफल हुई और फिर उनके अनवरत सफर का आगाज हो गया। उन्होंने ऐक्टर के रूप में चितचोर, घरौंदा, मेरी बीवी की शादी, बातों-बातों में, गोलमाल, नरम-गरम, श्रीमान-श्रीमती जैसी कई यादगार फ़िल्में दीं। वे ज्यादातर फ़िल्मों में मध्यवर्गीय समाज के नायक का प्रतिनिधित्व करते दिखे। उनकी हास्य फ़िल्मों को दर्शक आज भी याद करते हैं। उन्हें खुशी है कि वे अपने करियर में फ़िल्म इंडस्ट्री के श्रेष्ठ निर्देशक और श्रेष्ठ तकनीशियनों के साथ काम कर सके।
सन 1981 में मराठी फ़िल्म आक्रित से अमोल ने फ़िल्म निर्देशन में कदम रखा। अब तक वे कुल दस हिंदी-मराठी फ़िल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। उनकी पिछली हिंदी फ़िल्म पहेली को ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था जिस पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने निर्देशक के रूप में मनमाफिक फ़िल्में बनाई। बहुत जल्द फ़िल्म दुमकटा रिलीज होगी। उनकी यह फ़िल्म बासु दा और ऋषिकेष मुखर्जी को समर्पित होगी।
प्रमुख फिल्में
बतौर लेखक
बतौर निर्माता
बतौर निर्देशक
नामांकन और पुरस्कार
सन्दर्भ
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बाहरी कड़ियाँ
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| 1954–1969 | |
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| 1970–1989 | |
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| 1990–2009 | |
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