भिलाई
| साँचा:if empty Bhilai | |
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| भिलाई सिविक सेंटर में स्थित नेहरू आर्ट गैलरी भिलाई सिविक सेंटर में स्थित नेहरू आर्ट गैलरी | |
| साँचा:location map | |
| निर्देशांक: साँचा:coord | |
| ज़िला | दुर्ग ज़िला |
| प्रान्त | छत्तीसगढ़ |
| देश | साँचा:flag/core |
| ऊँचाई | साँचा:infobox settlement/lengthdisp |
| जनसंख्या (2011) | |
| • कुल | १०,६४,२२३ |
| • घनत्व | साँचा:infobox settlement/densdisp |
| भाषाएँ | |
| • प्रचलित | हिन्दी, छत्तीसगढ़ी |
| समय मण्डल | भामस (यूटीसी+5:30) |
| पिनकोड | 490XXX |
| दूरभाष कोड | 07693 |
| वाहन पंजीकरण | CG-07 |
| वेबसाइट | साँचा:url |
भिलाई (Bhilai) भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग ज़िले में स्थित एक नगर है। यह भारत का एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है और मध्य भारत का एक मुख्य शिक्षा केन्द्र भी है। भिलाई शिवनाथ नदी के तट पर बसा हुआ है। यह दुर्ग शहर से सटा हुआ है, जिस से दुर्ग-भिलाई वास्तव में इन जुड़वा शहरों का एक ही संयुक्त्त नगरीय क्षेत्र है। राष्ट्रीय राजमार्ग ५३ इसे कई अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ता है।[१][२]
विवरण
भिलाई शहर करीबन भारत के मध्य में बसा है। 1003406 की जनसंख्या के साथ, भिलाई भारत के छत्तीसगढ़ राज्य का तीसरा बड़ा शहर है। मुम्बई-नागपुर-बिलासपुर-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग 6 पर स्थित, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 30 किलोमीटर पश्चिम में भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अंतर्गत एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिये जगप्रसिद्ध शहर शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी नाम रखता है। भारत-रूस मैत्री के फ़लस्वरूप बना भिलाई इस्पात संयंत्र श्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिये लगातार ग्यारह बार प्रधानमंत्री ट्रॉफ़ी जीत चुका है।
भिलाई नाम की उत्पत्ति भिलाई गांव से हुई जहां भील ज निवास करती है, जो इस नगर के उत्तर में स्थित है। सन् 1956 तक भिलाई गांव एक छोटा सा ग्राम था, जिसकी जनसंख्या 350 थी। सन् 1955 में भारत एवं सोवियत रुस में संपन्न एक समझौते के अंतर्गत इस्पात कारखाना स्थापित किया गया। भिलाई इस्पात संयंत्र कारखाना स्थापित होने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में वृद्वि हुई। यह सन् 1955 तक एक छोटा, शांत और धान की खेती पर पोषित गांव मात्र था। 14 मार्च 1955 को भारत शासन और तत्कालीन सोवियत संघ के मध्य, भिलाई में एक मिलीयन टन क्षमता के इस्पात कारखाना लगाने का समझौता हुआ जिसने न केवल भिलाई जिसने न केवल भिलाई की, वरन् इसके आस-पास बसे सैकड़ों गांवों की काया पलट दी। मुंबई-हावड़ा रेल्वे लाइन के उत्तर में भिलाई इस्पात संयंत्र और उसकी टाउनशीप बनाने का निर्णय लिया गया और इसके दक्षिण में श्रमिकों के लिए अस्थायी निवास हेतु भूमि दी गई। अवधारणा यह थी कि कारखाना प्रारंभ होने के बाद, उक्त अस्थायी निवास हट जावेंगे और भूमि खाली हो जावेगी, किन्तु ऐसा हो न सका। बसाहट बढ़ती गई और मूलभूत सुविधा विहीन बस्तियाँ बनती गई। दुर्ग-भिलाई की जनसंख्या सन् 1951-71 के दशक में 86 प्रतिशत तथा 1971-81 के दशक में 113 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सन् 1981-91 के दशक में 89 प्रतिशत एवं सन् 1991-2001 के दशक में 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
चित्रदीर्घा
- Gayatri Shakti Peeth, Sec-6.jpg
सेक्टर-6 स्थित गायत्री शक्ति पीठ
- Bhilai Railway Station.jpg
भिलाई रेलवे स्टेशन
इन्हें भी देखें
सन्दर्भ
- ↑ "Inde du Nord - Madhya Pradesh et Chhattisgarh स्क्रिप्ट त्रुटि: "webarchive" ऐसा कोई मॉड्यूल नहीं है।," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172
- ↑ "Pratiyogita Darpan स्क्रिप्ट त्रुटि: "webarchive" ऐसा कोई मॉड्यूल नहीं है।," July 2007