संग्राम सिंह द्वितीय
| संग्राम सिंह द्वितीय | |
|---|---|
| जन्म |
संग्राम सिंह सिसोदिया |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| जातीयता | सिसोदिया राजपूत |
| नागरिकता | भारतीय |
संग्राम सिंह द्वितीय मेवाड़, के सिसोदिया राजवंश के शासक थे। इन्होंने उदयपुर में 'सहेलियों की बाड़ी' बनवाई तथा सीसारमा, उदयपुर में वैद्यनाथ जी के मंदिर का निर्माण कराया।
महराणा अमरसिंह द्वितीय के बाद इनके पुत्र संग्राम सिंह द्वितीय को मेवाड़ का शासक बनाया गया। इनका राज्याभिषेक 26 अप्रैल ,1711 ई. को हुआ जिसमे जयपुर के शासक जय सिंह द्वितीय भी आये थे। इनके द्वारा उदयपुर में सहेलियों की बाड़ी ,सीमारमा गाँव में वैधनाथ का विशाल मंदिर ,नाहर मगरी के महल ,उदयपुर के महलो में चीनी की चित्रशाला आदि बनावाये गये एवं वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति लिखवाई गई। महाराणा का 24 जनवरी, 1734 को देहान्त हो गया। इनके शासनकाल में मुग़ल बादशाह मुहम्मद फर्रुख शियर ने जजिया कर हटाने का फरमान जारी किया। परन्तु उसके कुछ समय बाद वापस जजिया कर लगा देने पर महाराणा ने कोई परवाह नहीं क। इसके बाद बादशाह बने रफीउद्दरजात ने जजिया कर समाप्त करने का हुक्म जारी किया।
महाराणा संग्रामसिंह के बारे में कर्नल जेम्स टॉड ने लिखा है की बप्पा रावल की गद्दी का गौरव बनाये रखने वाला यह अंतिम राजा हुआ।
इन्होंने उदयपुर में 'सहेलियों की बाड़ी' का निर्माण करवाया तथा मराठों के विरुद्ध भीलवाड़ा 'हुरडा सम्मेलन' की योजना बनाई। इन्होंने 18 बार युद्ध किए।
| मेवाड़ के राजपूत राजवंश (1326 –1884) | |
|---|---|
| राणा हम्मीर सिंह | (1326–1364) |
| राणा क्षेत्र सिंह | (1364–1382) |
| राणा लखा | (1382–1421) |
| राणा मोकल | (1421–1433) |
| राणा कुम्भ | (1433–1468) |
| उदयसिंह प्रथम | (1468–1473) |
| राणा रायमल | (1473–1508) |
| राणा सांगा | (1508–1527) |
| रतन सिंह द्वितीय | (1528–1531) |
| राणा विक्रमादित्य सिंह | (1531–1536) |
| बनवीर सिंह | (1536–1540) |
| उदयसिंह द्वितीय | (1540–1572) |
| महाराणा प्रताप | (1572–1597) |
| अमर सिंह प्रथम | (1597–1620) |
| करण सिंह द्वितीय | (1620–1628) |
| जगत सिंह प्रथम | (1628–1652) |
| राज सिंह प्रथम | (1652–1680) |
| जय सिंह | (1680–1698) |
| अमर सिंह द्वितीय | (1698–1710) |
| संग्राम सिंह द्वितीय | (1710–1734) |
| जगत सिंह द्वितीय | (1734–1751) |
| प्रताप सिंह द्वितीय | (1751–1754) |
| राज सिंह द्वितीय | (1754–1762) |
| अरी सिंह द्वितीय | (1762–1772) |
| हम्मीर सिंह द्वितीय | (1772–1778) |
| भीम सिंह | (1778–1828) |
| जवान सिंह | (1828–1838) |
| सरदार सिंह | (1838–1842) |
| स्वरूप सिंह | (1842–1861) |
| शम्भू सिंह | (1861–1874) |
| उदयपुर के सज्जन सिंह | (1874–1884) |
| फतेह सिंह | (1884–1930) |
| भूपाल सिंह | (1930–1947) |
| भगवंत सिंह | (1947-1970) |
| महेन्द्र सिंह | (1970-last king |
| साँचा:navbar | |
.
इन्हें भी देखें
- महाराणा सांगा (या, महाराणा संग्रामसिंह प्रथम)