लाल सिर वाला गिद्ध

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लाल सिर वाला गिद्ध
चित्र:Red-headed-Vulture.jpg
Scientific classification
Binomial name
सार्कोजिप्स काल्वस
(स्कोपॉली, १७८६)
चित्र:Sarcogyps calvus Verbreitung.png
लाल सिर वाले गिद्ध का वर्तमान आवासीय क्षेत्र
Synonyms
  • ईजिपिअस काल्वस
  • टॉरगॉस काल्वस

लाल सिर वाला गिद्ध (Sarcogyps calvus) जिसे एशियाई राजा गिद्ध, भारतीय काला गिद्ध और पौण्डिचैरी गिद्ध भी कहते हैं, भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला गिद्ध है।[१]

विवरण

चित्र:Red headed vulture.JPG
लाल सिर वाले गिद्ध की मादा रणथंभोर में

यह मध्यम आकार का गिद्ध है जो ७६ से ८६ से. मी. लंबा होता है और जिसके पंखों का फैलाव १.९९ से २.६ मीटर तक का होता है।[२][३] वयस्क का सिर गहरे लाल से नारंगी रंग का होता है और अवयस्क थोड़े हल्के रंग का होता है। इसका शरीर काले रंग का होता है और पंखों का आधार स्लेटी रंग का होता है। नर के आँख की पुतली हल्के सफ़ेद रंग की होती है जबकि मादा की पुतली गाढ़े भूरे रंग की होती है।[४]

वर्गीकरण

यह पुरानी दुनिया का गिद्ध है जो लगभग समूचे भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिणी चीन और इंडोचाइना में पाया जाता है।

वितरण और आवास

ऐतिहासिक रूप से यह गिद्ध अपने आवासीय क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में पाया जाता था। भारतीय उपमहाद्वीप से लेकर पूर्व में दक्षिण पूर्वी एशिया तक वितरित था और भारत से सिंगापुर तक पाया जाता था। आज इसका आवासीय क्षेत्र उत्तरी भारत तक सिकुड़ कर रह गया है। यह खुले मैदानों में, खेतों में और अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में देखने को मिलता है। यह पतझड़ीय वनों में, पहाड़ों की तलहटी में और नदियों की घाटियों में भी पाया जाता है। प्रायः यह समुद्र सतह से ३००० फ़ुट की ऊँचाई तक ही पाया जाता है।[५]

चित्र:Sarcogyps calvus -Berlin Zoo -upper body-8a.jpg
बर्लिन चिड़ियाघर में

संरक्षण स्थिति

इसकी निरंतर घटती हुई आबादी १९९४ से तेज़ी से घटने लगी और उसके बाद तो हर दूसरे साल इसकी आबादी आधी होने लगी। इसका मूलतः कारण पशु दवाई डाइक्लोफिनॅक है जो कि पशुओं के जोड़ों के दर्द को मिटाने में मदद करती है। जब यह दवाई खाया हुआ पशु मर जाता है और उसको मरने से थोड़ा पहले यह दवाई दी गई होती है और उसको यह गिद्ध खाता है तो उसके गुर्दे बंद हो जाते हैं और वह मर जाता है।[६] दो ही दशकों में यह लुप्त होने की कगार पर आ गया है। फलस्वरूप इसे घोर संकटग्रस्त जाति घोषित कर दिया गया है।[७] अब नई दवाई मॅलॉक्सिकॅम प्रचलन में आ गई है और यह गिद्धों के लिये हानिकारक भी नहीं हैं। मवेशियों के इलाज में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।[८][९] जब इस दवाई का उत्पादन बढ़ जायेगा तो सारे पशु-पालक इसका इस्तेमाल करेंगे और शायद गिद्ध बच जायें। साँचा:clear

इन्हें भी देखें

सन्दर्भ

  1. साँचा:cite book
  2. साँचा:cite web
  3. साँचा:cite book
  4. साँचा:cite book
  5. साँचा:cite book
  6. साँचा:cite journal
  7. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; iucn नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  8. साँचा:cite web
  9. साँचा:cite journal