रतिलाल बोरीसागर
रतिलाल मोहनलाल बोरीसागर | |
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![]() बोरिसागर गुजराती विश्वकोश ट्रस्ट; फरवरी 2019 | |
जन्म | साँचा:br separated entries |
मृत्यु | साँचा:br separated entries |
मृत्यु स्थान/समाधि | साँचा:br separated entries |
व्यवसाय | हास्यकार, निबंधकार, संपादक |
भाषा | गुजराती |
राष्ट्रीयता | Indian |
उल्लेखनीय सम्मान | साहित्य अकादमी पुरस्कार (2019) |
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}} रतिलाल मोहनलाल बोरीसागर (जन्म ३१ अगस्त १९३८) भारतीय राज्य गुजरात के गुजराती हास्य रस के लेखक, निबन्धकार और सम्पादक हैं। उनका जन्म एवं शिक्षा सावरकुंडला में हुई और उन्होंने वर्ष १९८९ में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। कुछ वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य करने के पश्चात् उन्होंने राज्य के पाठ्यपुस्तक बोर्ड से जुड़ गये जहाँ से वर्ष १९९८ में सेवा निवृत हुये। उन्होंने अपने जीवन में पहले कहानी लिखना आरम्भ किया लेकिन फिर हास्य रचनाओं में प्रशंसा प्राप्त की। उन्होंने विभिन्न हास्य संग्रह और हास्य उपन्यासों की रचना की जिसमें प्रशंसित पुस्तक इंजोयग्राफ़ी भी शामिल है। उन्होंने बाल साहित्य और हास्य साहित्य के क्षेत्र में काफी काम किया। उन्हें वर्ष २०१९ में उनके निबन्ध संग्रह मोजमा रेवु रे के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
जीवनी
बोरीसागर का जन्म ३१ अगस्त १९३८ को गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला में मोहनलाल और संतोकबेन बोरीसागर के घर में हुआ। उन्होंने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा अपने जिले से ही पूर्ण की। रतिलाल ने वर्ष १९५६ में मैट्रिक परीक्षा, १९६३ में बीए और १९६७ में एमए उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने विद्यालयी शिक्षा से जुड़ने के लिए बीएड की।[१][२][३] वर्ष १९८९ में बोरीसागर ने गुजरातिमा साहित्यिक सम्पादन: विवेचनात्मक अध्ययन (गुजराती में साहित्य सम्पादन: एक विवेचनात्मक अध्ययन) विषय पर थिसिस लिखकर पीएचडी प्राप्त की।[१][२]
बोरीसागर ने तीन वर्ष तक प्राथमिक विद्यालय और आठ वर्षों तक माध्यमिक स्तर के शिक्षक के रूप में कार्य किया।[१][२] उन्होंने कुछ समय के लिए डाक घर में लिपिक के रूप में भी काम किया।[२] वो वर्ष १९७१ में सावरकुंडला महाविद्यालय से गुजराती के आचार्य (प्रोफेसर) के रूप में जुड़ गये। वर्ष १९७४ में उन्होंने यह पद भी त्याग दिया और गुजरात राज्य पाठ्यपुस्तक बोर्ड में अकादमिक सचिव के रूप में जुड़ गये। उन्होंने वहाँ २१ वर्ष तक काम किया और वर्ष १९९८ में उपकुलसचिव (अकादमिक) से सेवानिवृत्त हुये।[१][२]
उन्होंने अखण्ड आनन्द पत्रिका का सात वर्षों तक सह-सम्पादन किया।[२]
पहचान
बोरीसागर की रचना मारक मारक को वर्ष १९७८ का ज्योतिन्द्र दवे हास्य पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके आनन्दलोक और एंजोयग्राफी को भी गुजराती साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुये।[१][२] एंजोयग्राफी को वर्ष १९९७ का घनश्यामदास शराफ़ सर्वोत्त्म साहित्य पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। उन्हें वर्ष २००२ में धानजी कानजी गांधी सुवर्ण चन्द्रक, २००३ में चन्द्रकान्त अंजारिया ट्रस्ट अवार्ड, २०११ में दहयाबाई पटेल साहित्यरत्न सुवर्ण चन्द्रक और २०११ में सच्चिदानन्द सम्मान प्राप्त हुआ।[२] वर्ष २०१९ में बोरीसागर को उनके निबन्ध संग्रह मोजमा रेवु रे के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।[४][५]
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
- गुजलिट पर रतिलाल बोरीसागर