ताज-उल-मस्जिद, भोपाल
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| ताज-उल मसाजिद (साँचा:lang)[१] | |
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| धर्म संबंधी जानकारी | |
| सम्बद्धता | साँचा:br separated entries |
| अवस्थिति जानकारी | |
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| भौगोलिक निर्देशांक | साँचा:coord |
| वास्तु विवरण | |
| प्रकार | मस्जिद |
| शैली | भारतीय-इस्लामी वास्तुकला, मुग़ल वास्तुकला |
| निर्माता | साँचा:if empty |
| वित्तपोषण | सुल्तान शाह जहां बेगम भोपाल बहादुर शाह ज़फ़र |
| ध्वंस | साँचा:ifempty |
| आयाम विवरण | |
| क्षमता | 175,000+ |
| अंदरूनी क्षेत्र | साँचा:convert[२] |
| गुंबद | 3 |
| मीनारें | 2 |
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भोपाल स्थित यह मस्जिद भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। गुलाबी रंग की इस विशाल मस्जिद की दो सफेद गुंबदनुमा मीनारें हैं, जिन्हें मदरसे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। तीन दिन तक चलने वाली यहां की वार्षिक तबलीगी इज़्तिमा (प्रार्थना) भारत भर से लोगों का ध्यान खींचती है।
इतिहास
इस मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल के आठवें शासक शाहजहांँ बेगम के शासन काल में प्रारंभ हुआ था, लेकिन धन की कमी के कारण उनके जीवंतपर्यंत यह बन न सकी। 1971 में यह मस्जिद पूरी तरह से बनकर तैयार हो सकी।[३]
वास्तु कला
ये मुगल वास्तु कला से प्रेरित है।[४]