जगदंबा कुमारी देवी
रानी जगदंबा कुमारी देवी नेपाल के लेफ़्टिनेंट जनरल मदन शमशेर जंगबहादुर राणा की पत्नी और प्रधानमंत्री चंद्र शमशेर जंगबहादुर राणा की बहू थी।[१] उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले में पैदा हुई रानी जगदंबा शादी के बाद काठमांडू के श्री दरवार में रहने लगी।[२]
रानी जगदंबा को नेपाल के बाहर रामेश्वरम और वाराणसी जैसे पवित्र स्थलों में जगदंबा नेपाली धर्मशाला निर्माण करवाने के साथ ही सार्वजनिक नल और मंदिर बनवाने का श्रेय दिया जाता है। उनहोंने वाराणसी में विद्या धर्म प्रचारिणी नेपाली समिति के माध्यम से नेपाली और भारतीय विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करने का प्रबंध किया। 1956 में अपने पति की स्मृति में उनहोंने मदन पुरस्कार गोष्ठी द्वारा वित्त पोषित मदन पुरस्कार पुस्तकालय की स्थापना करकर प्रसिद्ध नेपाली लेखकों को पुरस्कृत करने की परंपरा की शुरुआत की।[३] 1989 में उनकी मृत्यु पश्चात मदन पुरस्कार गोष्ठी ने नेपाली संस्कृति, साहित्य और कला के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देनेवाले लोगों के लिए जगदंबाश्री पुरस्कार की स्थापना की।[३] उनहोंने दान पुण्य के लिए जगदंबा दातव्य औषधालय और मदन धारा समिति की स्थापना करने के साथ ही साझा यातायात के इस्तेमाल हेतु श्री दरवार की 2.7 एकड़ ज़मीन दान दी।[४][५]
सम्मान
दीर्घा
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साझा यातायात के प्रांगण में जगदंबा कुमारी देवी की मूर्ति
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1959 में रामेश्वरम में स्थापित जगदंबा नेपाली धर्मशाला
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रामेश्वरम में अवस्थित जगदंबा नेपाली धर्मशाला में सजाया गया तख़्ता जिसमें लिखा है, “नेपाली यात्रियों के लिए श्रीमती रानी जगदंबा कुमारी देवी का उपहार, शिवरात्रि 1959”