कवलम माधव पनिक्कर
कवलम माधव पनिक्कर | |
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| Born | 03 June 1895 त्रावणकोर, ब्रिटिश भारत (वर्तमान केरल, भारत) |
| Died | December 10, 1963 (उम्र साँचा:age) मैसूर, कर्नाटक, भारत |
| Nationality | भारतीय |
| Occupation | राजनेता, राजनयिक, इतिहासकार, लेखक, पत्रकार |
| Employer | साँचा:main other |
| Organization | साँचा:main other |
| Agent | साँचा:main other |
| Known for | भारत के राजदूत (चीन, मिस्र, फ्रांस); एशियाई इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लेखन |
Notable work | साँचा:main other |
| Opponent(s) | साँचा:main other |
| Criminal charge(s) | साँचा:main other |
| Spouse(s) | साँचा:main other |
| Partner(s) | साँचा:main other |
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कवलम माधव पनिक्कर (3 जून 1895 – 10 दिसंबर 1963) एक भारतीय राजनेता, राजनयिक, इतिहासकार और लेखक थे। वे स्वतंत्र भारत की विदेश नीति के प्रारम्भिक निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कूटनीतिज्ञों में गिने जाते हैं। उन्होंने चीन, मिस्र और फ्रांस में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया तथा एशिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक लेखन किया।
प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा
पनिक्कर का जन्म त्रावणकोर राज्य (वर्तमान केरल) में हुआ। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा केरल में प्राप्त की और बाद में मद्रास में उच्च अध्ययन किया।
इसके बाद वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में इतिहास का अध्ययन करने गए तथा लंदन के मिडल टेम्पल में विधि की पढ़ाई की। इंग्लैंड में रहते हुए वे भारतीय छात्रों के संगठन ऑक्सफोर्ड मजलिस से जुड़े, जिसने उनके राजनीतिक विचारों और राष्ट्रवाद की समझ को प्रभावित किया।[१]
प्रारम्भिक करियर
भारत लौटने के बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। 1925 में वे पत्रकारिता से जुड़े और हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक बने।
बाद में वे भारतीय रियासतों की सेवा में आए और चैम्बर ऑफ प्रिंसेज़ के चांसलर के सचिव बने। उन्होंने पटियाला और बीकानेर रियासतों में विदेश मंत्री तथा बीकानेर के प्रधानमंत्री (1944–47) के रूप में कार्य किया।
स्वतंत्रता के बाद का राजनयिक करियर
स्वतंत्रता के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर वे भारतीय विदेश सेवा से जुड़े।
उन्होंने निम्न प्रमुख पदों पर कार्य किया:
- भारत के राजदूत – चीन (1948–1952)
- भारत के राजदूत – मिस्र (1952–1953)
- भारत के राजदूत – फ्रांस (1956–1959)
उन्हें भारत–चीन संबंधों के प्रारम्भिक वास्तुकारों में गिना जाता है। वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे।
संविधान सभा और नीति योगदान
पनिक्कर संविधान सभा के सदस्य थे और रियासतों के भारत संघ में एकीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संघीय ढाँचे में मजबूत केंद्र की आवश्यकता पर जोर दिया और अंतरराष्ट्रीय समझौतों से संबंधित विषयों पर बहस में भाग लिया।
वे 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य भी रहे, जिसने भाषाई आधार पर राज्यों की सीमाओं के निर्धारण में योगदान दिया।
अकादमिक जीवन और लेखन
राजनयिक सेवा से निवृत्त होने के बाद वे शैक्षणिक क्षेत्र में लौटे और मैसूर विश्वविद्यालय के कुलपति बने।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं:
- Asia and Western Dominance (1953)
- India and the Indian Ocean
- Two Chinas (1955)
- A Survey of Indian History
उन्होंने नाटक और उपन्यास भी लिखे।
विरासत
पनिक्कर को आधुनिक भारत के प्रमुख कूटनीतिज्ञों और इतिहासकारों में गिना जाता है। एशियाई इतिहास और भू-राजनीति पर उनके विचार आज भी अध्ययन का विषय हैं।
== संदर्भ ==Kavalam Madhava Panikkar. Encyclopaedia Britannica. Retrieved 12 March 2026 from https://www.britannica.com/biography/Kavalam-Madhava-Panikkar
- ↑ K. M. Panikkar – Constituent Assembly profile.