उत्तरा (महाभारत)

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चित्र:Abhimanyu bids farewell to his wife Uttara..jpg
अभिमन्यु उत्तरा से अंतिम विदा लेते हुए

उत्तरा राजा विराट की पुत्री थीं। जब पाण्डव अज्ञातवास कर रहे थे, उस समय अर्जुन वृहनलला नाम ग्रहण करके रह रहे थे। वृहनलला ने उत्तरा को नृत्य, संगीत आदि की शिक्षा दी थी। जिस समय कौरवों ने राजा विराट की गायें हस्तगत कर ली थीं, उस समय अर्जुन ने कौरवों से युद्ध करके अपूर्व पराक्रम दिखाया था। अर्जुन की उस वीरता से प्रभावित होकर राजा विराट ने अपनी कन्या उत्तरा का विवाह अर्जुन से करने का प्रस्ताव रखा था किन्तु अर्जुन ने यह कहकर कि उत्तरा उनकी शिष्या होने के कारण उनकी पुत्री के समान थी, उस सम्बन्ध को अस्वीकार कर दिया था। कालान्तर में उत्तरा का विवाह अभिमन्यु के साथ सम्पन्न हुआ था। चक्रव्यूह तोड़ने के लिए जाने से पूर्व अभिमन्यु अपनी पत्नी से विदा लेने गया था। उस समय उसने अभिमन्यु से प्रार्थना की थी हे उत्तरा के धन रहो तुम उत्तरा के पास ही[१] परीक्षित का जन्म इन्हीं की कोख से अभिमन्यु की मृत्यु के बाद हुआ था। उत्तरा के भाई का नाम उत्तर था। महाभारत के युद्ध के अंत मे अश्वथामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उत्तरा के गर्भ को नष्ठ कर दिया था , जिसे बाद में भगवान कृष्ण द्वारा पुर्नजीवित किया गया।

सन्दर्भ

  1. जयद्रथ वध: मैथिलीशरण गुप्त, तृतीय सर्ग

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