यात्री
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जब कोई व्यक्ति किसी स्थान पर जा रहा होता है, तो उसका रूप सामाजिक द्रष्टि मे बदल जाता है, वह एक यात्री के रूप मे हो जाता है, यात्रा करने के लिये पैदल, वाहन, जो भी साधन हों, के द्वारा सफ़र करना ही यात्रा कहलाता है, और जो उनके द्वारा, जा रहा होता है, यात्री कहलाता है। मानव समाज मे मानव का रूप परिवर्तन का यह सहज सत्य है। वैसे तो प्रत्येक जीव यात्रा करने के लिये ही जीवन धारण करता है, और संसार मे अपनी जीवन यात्रा को पूरा करता है, जो साथ रहकर जीवन भर या पल भर साथ चलते हैं वे ही सहयात्री कहलाते हैं।