मातृवंश समूह ऍल१

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मध्य अफ़्रीका की पिग्मी जनजातियों के स्त्री ओर पुरुष अक्सर मातृवंश समूह ऍल१ के वंशज होते हैं

मनुष्यों की आनुवंशिकी (यानि जॅनॅटिक्स) में मातृवंश समूह ऍल१ या माइटोकांड्रिया-डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप L1 एक अत्यंत प्राचीनतम मातृवंश समूह है। इस मातृवंश समूह के सदस्य व्यक्ति (स्त्री ओर पुरुष दोनों) ज़्यादातर मध्य ओर पश्चिम अफ़्रीका में पाए जाते हैं। इस इलाक़े की पिग्मी जनजाति की अम्बेंगा शाखा के लोगों में यह मातृवंश सब से अधिक मिलता है। अनुमान है के जिस नारी से यह मातृवंश शुरू हुआ वह आज से लगभग १५०,००० से १७०,००० वर्ष पहले पूर्वी अफ़्रीका में रहती थी।[१]

अन्य भाषाओँ में

अंग्रेज़ी में "वंश समूह" को "हैपलोग्रुप" (haplogroup), "पितृवंश समूह" को "वाए क्रोमोज़ोम हैपलोग्रुप" (Y-chromosome haplogroup) और "मातृवंश समूह" को "एम॰टी॰डी॰एन॰ए॰ हैपलोग्रुप" (mtDNA haplogroup) कहते हैं।

इन्हें भी देखें

सन्दर्भ

साँचा:reflist

  1. Gonder, Mary Katherine, Holly M Mortensen, Floyd A Reed, Alexandra de Sousa and Sarah A Tishkoff, Whole-mtDNA Genome Sequence Analysis of Ancient African Lineages, Mol. Biol. Evol, 24(3):757-68. 2007