भारतीय वन नीति

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1894 में घोषित पहली राष्ट्रीय वन नीति देश के सामान्य कल्याण को बढ़ावा देने के लिए जंगलों के प्रबंधन के उद्देश्य के साथ प्रख्यात की गयी थी । नीति 1952 में संशोधित की गयी, जिसका उद्देश्य संरक्षण और उत्पादन के बीच संतुलन लाने का था।

1952 की नीति को भारत सरकार द्वारा संकल्प संख्या 3-1/1986-एफपी दिनांक 7 दिसंबर, 1988 के अनुसार संशोधित किया गया था।1988 की नई राष्ट्रीय वन नीति संरक्षण और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने पर जोर देने के साथ 1952 वन नीति से बदली गयी ।

राष्ट्रीय वन नीति, 1988 (एनएफपी) का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण का पारिस्थितिक संतुलन की स्थिरता और रखरखाव सुनिश्चित करना है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ के अधीनस्थ है। नीति बड़े पैमाने पर उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए महिलाओं सहित लोगों की भागीदारी पर जोर देती है। [१]

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सन्दर्भ

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