प्लाटर

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हार्ड डिस्क प्लाटर या हार्ड डिस्क में लगी हुई धातु की थाल एलुमिनियम या शीशे जैसे सख्त धातु से बना वह गोल चक्र है जिसपर चुंबकीय पदार्थ का लेप लगाया गया होता है। यह हार्ड डिस्क ड्राइव में आंकड़ों को लम्बे समय के लिये सहेजने के काम आता है।[१] यह गोल चक्र थाली या प्लेट जैसा दिखता है। हार्ड डिस्क में कई प्लेटें एक के ऊपर एक लगी होती हैं जो कि एक तकले कि धुरी पे टिकी होती हैं। एक प्लाटर पर दोनो तरफ आंकणों को लिखा जा सकता है। इसके लिए हर प्लाटर के लिये लिखने पढने वाली २ नोक (साँचा:lang-en) चाहिये, एक ऊपर कि तरफ और एक नीचे की तरफ।

हार्ड डिस्क में एक के उपर एक लगि हुई धातु कि प्लेटें (प्लाटर)

संगणक के शुरु होने पर ये प्लेटें घुमने लगती हैं। प्रति मिनट ये कितने चक्कर घुमती हैं यह हार्ड डिस्क के मॉडेल पर निर्भर करता है। ये प्लेटें लगभग ७२०० चक्र प्रति मिनट कि गति से घूम सकती हैं। प्लाटर पर आंकणों को विभिन्न पटरियों (ट्रैक), क्षेत्रों (सेक्टर) व बेलनाकार[२] पटरियों (सिलिन्डर) में सहेजा जाता है।

रेखांकन

हर प्लाटर कि चुम्बकीय परत छोटे छोटे माइक्रो मीटर के आकार के चुम्बकिय खंडों में विभाजित होते हैं, जिन्हें सूचना कि एक बाइनरी इकाई को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। २००६ में प्लाटर पर एक चुम्बकिय खण्ड २००-२५० नैनोमीटर के चौडाई के आकार के होते थे जिसमें प्रति वर्ग इंच १०० अरब बिट आंकणे लिखे जा सकते थे।[३]

संदर्भ