एथिलीन ग्लाइकोल

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चित्र:Glykol - Glycol.svg
एथलीन ग्लाइकोल

एथलीन ग्लाइकोल (Ethylene glycol ; IUPAC नाम : इथेन-1,2-डायोल) एक कार्बनिक यौगिक है जो मोटरगाड़ियों में प्रतिहिमकारी (antifreeze) के रूप में उपयोग में आता है। इसे 'ग्लाइकोल' भी कहते हैं। इसका रासायनिक सूत्र (HO-CH2-CH2-OH) है। यह बहुलकों का पूर्वरूप था।

शुद्ध एथलीन ग्लाइकोल गंधहीन, रंगहीन, सिरप जैसा और स्वाद में मीठा द्रव है। यह विषैला होता है तथा इसे ग्रहण करने पर मृत्यु हो सकती है। यह सुंगधित तैलीय द्रव है, जिसका क्वथनांक १९७.५° सें. तथा गलनांक- १७.४° सें. है। आपेक्षित धनत्व ०° सें. पर १.१२५ है। यह ग्लिसरीन की भाँति मीठा तथा पानी और ऐलकोहल के साथ मिश्र्य है। औद्योगिक विधि में इसे एथिलीन गैस से, जो पेट्रोलियम भंजन का एक उपजात है, प्राप्त करते है। हाइपोक्लोरस अम्ल की अभिक्रिया से यह एथिलीन क्लोरोहाइड्रिन में बदलता है, जिसे दूधिया चूने के साथ गरम करके एथिलीन ग्लाइकोल प्राप्त करते हैं।

इसके गुणधर्म प्राथमिक ऐलकाहलों से मिलते है। हाइड्राक्सिल समूह को हैलोजन से, अथवा हाइड्राक्सिल के हाइड्रोजन को ऐल्किल समूहों, अथवा क्षार धातुओं से, प्रतिस्थापित किया जा सकता है। आक्सीकरण पर पहले यह ग्लाइकोलिक अम्ल तथा पश्चात् आक्सैलिक अम्ल देता है। नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक अम्लों की अभिक्रिया से एथिलीन डाइनाइट्रेट, एक तैलीय विस्फोटक द्रव (क्वथनांक ११४-११६° सें.), प्राप्त होता है, जिसे नाइट्रोग्लिसरीन की भाँति विस्फोटक के रूप में प्रयुक्त करते हैं। एथिलीन ग्लाइकोल को पानी में मिलाने पर पानी का हिमांक गिर जाता है। इसलिये उद्योगों में इसका विस्तृत उपयोग हिमीकरण (फ्रीजिंग) निवारण के लिये होता है।

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