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	<title>छत्तीसगढ़ी भाषा - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;रोहित साव27: ExclusiveEditor (वार्ता) के अवतरण 5451386 पर पुनर्स्थापित : व्यक्तिगत विचार</title>
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		<updated>2022-03-22T16:26:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/index.php/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/ExclusiveEditor&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/ExclusiveEditor&quot;&gt;ExclusiveEditor&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:ExclusiveEditor&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:ExclusiveEditor (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;वार्ता&lt;/a&gt;) के अवतरण 5451386 पर पुनर्स्थापित : व्यक्तिगत विचार&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''छत्तीसगढ़ी''' [[भारत]] के [[छत्तीसगढ़]] राज्य में बोली जाने वाली [[भाषा]] है। यह [[हिन्दी]] के अत्यन्त निकट है और इसकी लिपि [[देवनागरी]] है। छत्तीसगढ़ी का अपना समृद्ध [[साहित्य]] व [[व्याकरण]] है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छत्तीसगढ़ी 2 करोड़ लोगों की [[मातृभाषा]] है। यह [[पूर्वी हिन्दी]] की प्रमुख [[बोली]] है और [[छत्तीसगढ़]] राज्य की प्रमुख भाषा है। राज्य की 82.56 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में तथा शहरी क्षेत्रों में केवल 17 प्रतिशत लोग रहते हैं। यह निर्विवाद सत्य है कि छत्तीसगढ़ का अधिकतर जीवन छत्तीसगढ़ी के सहारे गतिमान है। यह अलग बात है कि गिने-चुने शहरों के कार्य-व्यापार राष्ट्रभाषा हिन्दी व उर्दू, पंजाबी, उड़िया, मराठी, गुजराती, बाँग्ला, तेलुगु, सिन्धी आदि भाषा में एवं आदिवासी क्षेत्रों में हलबी, भतरी, मुरिया, माडिया, पहाड़ी कोरवा, [[उराँव]] आदि बोलियो के सहारे ही संपर्क होता है। इस सबके बावजूद छत्तीसगढ़ी ही ऐसी भाषा है जो समूचे राज्य में बोली, व समझी जाती है। एक दूसरे के दिल को छू लेने वाली यह छत्तीसगढ़ी एक तरह से छत्तीसगढ़ राज्य की संपर्क भाषा है। वस्तुतः छत्तीसगढ़ राज्य के नामकरण के पीछे उसकी भाषिक विशेषता भी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==छत्तीसगढ़ी की प्राचीनता==&lt;br /&gt;
सन् 875 ईस्वी में [[बिलासपुर]] जिले के रतनपुर में चेदिवंशीय राजा कल्लोल का राज्य था। तत्पश्चात एक सहस्र वर्ष तक यहाँ [[हैहय राजवंश|हैहयवंशी नरेशों]] का राजकाज आरम्भ हुआ। कनिंघम (1885) के अनुसार उस समय का “दक्षिण कोसल” ही “महाकोसल” था और यही “बृहत् छत्तीसगढ़” था, जिस में उड़ीसा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कुछ जिले, अर्थात् [[सुन्दरगढ़]], [[सम्बलपुर|संबलपुर]], [[बलाँगीर]], [[बौदफुलवनी]], [[कालाहाँड़ी]], [[कोरापुट]] (वर्तमान ओड़िसा में), [[भंडारा]], [[चन्द्रपुर|चंद्रपुर]], [[शहडोल]], [[मंडला]], [[बालाघाट]] (वर्तमान मध्य प्रदेश में) शामिल थे। उत्तर में स्थित [[अयोध्या]] राज्य [[कोशल]] राज्य कहलाया जहाँ की बोली [[अवधी]] है। दक्षिण कौशल में अवधी की ही सहोदरा छत्तीसगढ़ी कहलाई। हैहयवंशियों ने इस अंचल में इसका प्रचार कार्य प्रारम्भ किया जो यहाँ पर राजकीय प्रभुत्व वाली सिद्ध हुई। इससे वे बोलियाँ बिखर कर पहाड़ी एवं वन्याञ्चलों में सिमट कर रह गई और इन्हीं क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ी का प्राचीन रूप स्थिर होने लगा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छत्तीसगढ़ी के प्रारम्भिक लिखित रूप के बारे में कहा जाता है कि वह 1703 ईस्वी के [[दंतेवाड़ा|दन्तेवाड़ा]] के [[दंतेश्वरी मंदिर]] के मैथिल पण्डित भगवान मिश्र द्वारा लिखित [[अभिलेख|शिलालेख]] में है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== छत्तीसगढ़ी साहित्य ==&lt;br /&gt;
'''{{मुख्य|छत्तीसगढ़ी साहित्य}}'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्री प्यारेलाल गुप्त अपनी पुस्तक &amp;quot; प्राचीन छत्तीसगढ़&amp;quot; में बड़े ही रोचकता से लिखते है - &amp;quot; छत्तीसगढ़ी भाषा [[अर्धमागधी]] की दुहिता एवं [[अवधी]] की सहोदरा है &amp;quot; (पृ 21 प्रकाशक रविशंकर विश्वविद्यालय, 1973)। &amp;quot; छत्तीसगढ़ी और अवधी दोनों का जन्म अर्धमागधी के गर्भ से आज से लगभग 1080 वर्ष पूर्व नवीं-दसवीं शताब्दी में हुआ था।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ॰ [[भोलानाथ तिवारी]], अपनी पुस्तक &amp;quot; हिन्दी भाषा&amp;quot; में लिखते है - &amp;quot; छत्तीसगढ़ी भाषा भाषियों की संख्या अवधी की अपेक्षा कहीं अधिक है और इस दृष्टि से यह बोली के स्तर के ऊपर उठकर भाषा का स्वरुप प्राप्त करती है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भाषा साहित्य पर और साहित्य भाषा पर अवलंबित होते है। इसीलिये भाषा और साहित्य साथ-साथ पनपते है। परन्तु हम देखते है कि छत्तीसगढ़ी लिखित साहित्य के विकास अतीत में स्पष्ट रूप में नहीं हुई है। अनेक लेखकों का मत है कि इसका कारण यह है कि अतीत में यहाँ के लेखकों ने [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] भाषा को लेखन का माध्यम बनाया और छत्तीसगढ़ी के प्रति ज़रा उदासीन रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसीलिए छत्तीसगढ़ी भाषा में जो साहित्य रचा गया, वह करीब एक हज़ार साल से हुआ है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनेक साहित्यको ने इस एक हजार वर्ष को इस प्रकार विभाजित किया है :&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*(१) '''गाथा युग''' (सन् 1000 से 1500 ई. तक)&lt;br /&gt;
*(२) '''भक्ति युग''' - मध्य काल (सन् 1500 से 1900 ई. तक)&lt;br /&gt;
*(३) '''आधुनिक युग''' (सन् 1900 से आज तक)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये विभाजन साहित्यिक प्रवृत्तियों के अनुसार किया गया है यद्यपि प्यारेलाल गुप्त जी का कहना ठीक है कि - &amp;quot; साहित्य का प्रवाह अखण्डित और अव्याहत होता है।&amp;quot; श्री प्यारेलाल गुप्त जी ने बड़े सुन्दर अन्दाज़ से आगे कहते है - &amp;quot; तथापि विशिष्ट युग की प्रवृत्तियाँ साहित्य के वक्ष पर अपने चरण-चिह्म भी छोड़ती है : प्रवृत्यानुरुप नामकरण को देखकर यह नहीं सोचना चाहिए कि किसी युग में किसी विशिष्ट प्रवृत्तियों से युक्त साहित्य की रचना ही की जाती थी। तथा अन्य प्रकार की रचनाओं की उस युग में एकान्त अभाव था।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह विभाजन किसी प्रवृत्ति की सापेक्षिक अधिकता को देखकर किया गया है। एक और उल्लेखनीय बत यह है कि दूसरे आर्यभाषाओं के जैसे छत्तीसगढ़ी में भी मध्ययुग तक सिर्फ पद्यात्मक रचनाएँ हुई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[छत्तीसगढ़ी साहित्य]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20090829213006/http://www.gurturgoth.com/ गुरतुर गोठ - वर्तमान में छत्तीसगढ़ी भाषा की वेब-ब्‍लाग-पत्रिका]&lt;br /&gt;
* [https://dictionary.gurturgoth.com/ Online Chhattisgarh Hindi Dictionary छत्‍तीसगढ़ी-हिन्‍दी शब्‍दकोश]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20170425205344/http://jayjohar.com/ जय जोहार- छत्तीसगढ़ का पहला छत्तीसगढ़ी वेब टीवी]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20070108044414/http://www.languageshome.com/English-Chhattisgarhi.htm छत्तीसगढ़ी भाषा ऑनलाइन सीखिए]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20190608071237/http://anjorenews.blogspot.com/ अंजोर- छत्तीसगढ़ी मासिक ​पत्रिका]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{हिन्दी की बोलियाँ}}&lt;br /&gt;
{{हिन्द-आर्य भाषाएँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:छत्तीसगढ़ भाषा व साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:छत्तीसगढ़ की भाषाएँ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दी की बोलियाँ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारत की भाषाएँ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषाएँ]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:पूर्वी हिन्द-आर्य भाषाएँ]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
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