वन्य अभयारण्य
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अभयारण्य का अर्थ है अभय + अरण्य। अर्थात ऐसा अरण्य या वन जहां जानवर बिना किसी भय के रहते हैं । सरकार अथवा किसी अन्य संस्था द्वारा संरक्षित वन, पशु-विहार या पक्षी विहार को अभयारण्य कहते हैं। इनका उद्देश्य पशु, पक्षी या वन संपदा को संरक्षित करना, उसका विकास करना व शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में उसकी मदद लेना होता है। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकरों ने राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव पशु विहार स्थापित किए। केंद्र सरकार ने कई परियजनाओं को संस्तुति प्रदान की,जिसका उद्देश्य इस गंभीर संकट में पड़े कुछ प्राणियों को सुरक्षा प्रदान करना है। मार्च 2020 तक भारत में 101 राष्ट्रीय पार्क, 553 वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरीज, 86 कंजर्वेशन रिज़र्व और 163 कम्युनिटी रिज़र्व हैं ।
कुछ अभयारण्य
गिर वन्यजीव अभयारण्य
गुजरात में वन्य प्राणियों से समृद्ध गिर अभयारण्य लगभग 1424 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस वन्य अभयारण्य में अधिसंख्य मात्रा में पुष्प और जीव-जन्तुओं की प्रजातियां मिलती है। यहां स्तनधारियों की 30 प्रजातियां, सरीसृप वर्ग की 20 प्रजातियां और कीडों- मकोडों तथा पक्षियों की भी बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है। दक्षिणी अफ्रीका के अलावा विश्व का यही ऐसा एकलौता स्थान है जहां शेरों को अपने प्राकृतिक आवास में रहते हुए देखा जा सकता है। जंगल के शेर के लिए अंतिम आश्रय के रूप में गिर का जंगल, भारत के महत्त्वपूर्ण वन्य अभयारण्यों में से एक है। गिर के जंगल को सन् 1969 में वन्य जीव अभयारण्य बनाया गया और 6 वर्षों बाद इसका 140.4 वर्ग किलोमीटर में विस्तार करके इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में स्थापित कर दिया गया। यह अभ्यारण्य अब लगभग 258.71 वर्ग किलोमीटर तक विस्तृत हो चुका है। वन्य जीवों को सरक्षंण प्रदान करने के प्रयास से अब शेरों की संख्या बढकर 312 हो गई है।
सूखें पताड़ वाले वृक्षों, कांटेदार झाड़ियों के अलावा हरे-भरे पेड़ों से समृद्ध गिर का जंगल नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां के मुख्य वृक्षों में सागवान, शीशम, बबूल, बेर, जामुन, बील आदि है। वर्ष संख्या बाघ:बाघिन:शावक भारत के सबसे बड़े कद का हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा और बारहसिंगा भी यहां देखा जा सकता है साथ ही यहां भालू और बड़ी पूंछ वाले लंगूर भी भारी मात्रा में पाए जाते है। कुछ ही लोग जानते होंगे कि गिर भारत का एक अच्छा पक्षी अभयारण्य भी है। यहां फलगी वाला बाज, कठफोडवा, एरीओल, जंगली मैना और पैराडाइज फलाईकेचर भी देखा जा सकता है। साथ ही यह अधोलिया, वालडेरा, रतनघुना और पीपलिया आदि पक्षियों को भी देखने के लिए उपयुक्त स्थान है। इस जंगल में मगरमच्छों के लिए फॉर्म का विकास किया जा रहा है जो यहां के आकर्षण को ओर भी बढा देगा। दर्शकों के लिए गिर वन्य अभयारण्य मध्य अक्टूबर महीने से लेकर मध्य जून तक खोला जाता है लेकिन मानसून के मौसम में इसे बन्द कर दिया जाता है।
नागरहोल अभयारण्य
कर्नाटक में स्थित नागरहोल अपने वन्य जीव अभयारण्य के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह उन कुछ जगहों में से एक है जहां एशियाई हाथी पाए जाते हैं। हाथियों के बड़े-बड़े झुंड यहां देखे जा सकते हैं। मानसून से पहले की बारिश में यहां बड़ी संख्या में रंगबिरंगे पक्षी दिखाई देते हैं। उस समय पूरा वातावरण उनकी चहचहाट से गूंज उठता है। पशुप्रेमियों के लिए यहां देखने और जानने के लिए बहुत कुछ है। एक जमाने में यह जगह मैसूर के राजाओं के शिकार का स्थल था। लेकिन बाद में इसे अभयारण्य बना दिया गया। अब यह राजीव गांधी अभयारण्य के नाम से जाना जाता है। यह पार्क दक्कन के पठार का हिस्सा है। जंगल के बीच में नागरहोल नदी बहती है, जो कबीनी नदी में मिल जाती है। कबीनी नदी पर बने बांध के कारण पार्क के दक्षिण में एक झील बन गई है जो इस उद्यान को बांदीपुर टाइगर रिजर्व से अलग करती है।
- Herd of Chital deer at entrance to Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Chital herd, Nagarahole WLS, Mysore District
- Chital deer pair at Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Chital pair, Nagarahole WLS, Mysore District
- Dhole (asiatic wild dog) at Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Dhole (wild dog) pair, Nagarahole WLS, Mysore District
- Elephant herd at Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Elephant herd, Nagarahole WLS, Mysore District
- Gaur herd at Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Natures call!!, Gaur herd, Nagarahole WLS, Mysore District
- Male Gaur (asiatic wild ox) at Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Male Gaur, Nagarahole WLS, Mysore District
- Sambar deer, mother and fawn pair at Nagarahole wildlife sanctuary.jpg
Sambar mother and fawn, Nagarahole WLS, Mysore District